चमक उठती हैं,सड़कें.,अंबर चूमती इमारतें..दौड़ता है ,विकास-रथ .,लांघकर पुरानी रिवायतें

सुनील शर्मा
वरिष्ठ पत्रकार

आशियानों पर जब बुलडोजर चलता है, तो सिर्फ घर ही नहीं टूटते.. उसके मलबे के नीचे दब जाते हैं., सालों की मेहनत, उम्मीदें और भविष्य भी
हाईलाइट्स

  • जमीन खाली करने का नोटिस |
  • अवैध निर्माण के दावे, रहवासियों में रोष |
  • जवाबदेही में विफलता पर सवाल |

    विकास के नाम पर हो रही तोड़फोड़ और बेघर होते लोगों का दर्द ..यह ऐसी विडंबना है जहाँ एक ओर चकाचौंध और प्रगति की इमारतें खड़ी होती हैं, वहीं दूसरी ओर गरीबों की छत छिन जाती है। विकास की चमक, सड़कें, फ्लाईओवर, परियोजनाएं .. बेशक तरक्की की कहानी कहते हैं। लेकिन विकास की नींव अक्सर झुग्गियों और कच्ची बस्तियों-मकानों पर रखी जाती हैं। इन्हें अवैध करार देकर ढहा दिया जाता है। आशियानों पर जब बुलडोजर चलता है, तो सिर्फ घर ही नहीं टूटते.. उसके मलबे के नीचे दब जाते हैं, सालों की मेहनत, उम्मीदें और भविष्य भी ।
    गौरतलब है कि कोलियरी गांव की 50 से अधिक परिवारों को नोटिस जारी कर ज़मीन खाली करने काे कहा है। साथ ही, चेतावनी दी है कि खाली नहीं करने वालों के मकानों को तोड़कर निर्माण ढहा दिया जाएगा।यहां 30- 40 साल से लोग मकान बनाकर रह रहे हैं ।नोटिस के जरिए से प्रशासन ने बताया कि विकास क्षेत्र में बिना अनुमति के अवैध निर्माण किया गया है। सरकारी परियोजना के लिए जमीन ख़ाली कराई जा रहीं। नोटिस चस्पा होने के बाद गांव में डर का माहौल है। ग्रामीणों को आशंका है कि उनके मकान तोड़े जा सकते हैं। हालांकि, प्रशासन ने साफ किया है कि फिलहाल किसी भी मकान को नहीं तोड़ा जाएगा। कार्रवाई सिर्फ घर के अलावा बनी बाड़ी-बाउंड्रीवाल तक रहेगी। दस्तावेजों पर.. यहीं का पता-
    करीब 2 हजार की आबादी वाले ग्राम कोलियारी में 50 से ज्यादा परिवार कार्रवाई से प्रभावित होंगे। नोटिस में अवैध कब्जा करने वालों को बिना पूर्व सूचना हटाने की चेतावनी दी गई हैं। इधर गांव में लगातार बैठकें हो रहीं। लोगों में भय व्याप्त है। चिंतित ग्रामीणों का कहना है कि नकटी (राजधानी) गांव में हुई घटना के बाद यहां भी वैसी ही स्थिति बनने का अंदेशा है। उनका कहना है ,कई परिवार 50- 60 साल से यहां रह रहे हैं,कुछ 15-20 साल से बसे हैं। पुराने मकानों के साथ प्रधानमंत्री आवास योजना के मकान भी बने हैं। सालों से टैक्स दे रहे ।आधार कार्ड, वोटर कार्ड,बिजली बिल सहित सरकारी दस्तावेज में यहीं का पता हैं। पूर्वज यहीं रहते थे। जमीन विवाद ही नहीं था ।

घरों पर चस्पा हैं..आम सूचना –
उल्लेखनीय रहे कि किसी को व्यक्तिगत (नाम से) नोटिस नहीं दी गई है। सार्वजनिक सूचना के रूप में घरों पर नोटिस चस्पा हैं।पंचायत में भी कोई जानकारी नहीं दी गई । न ही पुनर्वास या वैकल्पिक व्यवस्था की बारे में कोई जिक्र किया गया है। रहवासियों ने कहा ,हमारा जीवन गांव से जुड़ा है, हम कहीं और नहीं बसना चाहते। विधायक ओंकार साहू गांव पहुंचे थे । ग्रामीणों से चर्चा की। अफसरों से भी फोन पर बात की थीं।भरोसा दिलाया है ,मकान नहीं टूटने देंगे।जहां लोग रहते हैं, वहां कार्रवाई नहीं होनी चाहिए।गांव में खाली सरकारी जमीन पर नया कब्ज़ा भी नहीं होना चाहिए।

बड़ा सवाल – अपनी जिम्मेदारी नहीं निभाने वाले अफसरों पर कब होगी कार्रवाई
जब निर्माण हुए..तब क्यों नहीं रोका-
अपना आशियाना खोने के डर से परेशान स्थानीय लोगों ने शासन प्रशासन से सवाल किया है कि जब बस्ती बस रही थी, मकान बन रहे थे..तब ये नेता नौकरशाह ! . सब कहां थे, तब क्यों नहीं रोका गया। यह बड़ा सवाल है। जब लोकमाया ने अवैध निर्माण रोकने में विफल रहने वाले के खिलाफ कार्रवाई के बारे में पूछा ,तो कोई जवाब नहीं मिला।18 जून को जारी नोटिस के बाद से कोलियरी में रहने वाले लोग बेचैन हैं। ज्यादातर नोटिस नाम से नहीं ..मकानों पर चस्पा किए गए हैं।
असल गुनहगार कौन ..?
सरकारी जमीन पर अपना आशियाना बनाने वाले जितने गुनहगार’ हैं, उनसे बड़ा गुनाह उनका है, जिनके कंधों पर अवैध निर्माण रोकने की जिम्मेदारी है।अगर अपनी जिम्मेदारी ठीक से निभाई होती तो सरकारी जमीन पर अवैध मकान (कथित )नहीं बन पाते।


खसरा नंबर के आधार पर जांच-
खसरा नंबर 905, 906, 907 सरकारी जमीन दर्ज हैं। रिकॉर्ड के आधार पर जमीन की जांच की जा रही। प्रशासन का कहना है, कुछ नए निर्माण हुए हैं, लेकिन अधिकतर पुराने हैं । कई प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बने हैं। फिलहाल किसी मकान को हटाने की कार्रवाई नहीं होगी

प्रशासन ने कहा, जमीन को लेकर कोई नया विवाद नहीं है ।अपील की गई है ,अफवाहों पर ध्यान न दें। वर्तमान में केवल खाली सरकारी जमीन को सुरक्षित रखने की प्रक्रिया चल रही । किसी परिवार को बेघर करने की कोई मंशा नहीं है।

जिम्मेदारों के बोल –
अफसरों ने कहा,सरकारी जमीन पर घर के अलावा बनाई गई बाड़ियां व बाउंड्रीवाल हटाई जाएंगी। ताकि भविष्य में जरूरत पड़ने पर जमीन का सरकारी प्रयोजनों में इस्तेमाल किया जा सके।प्रशासन ने साफ़ किया, निजी संस्थान को जमीन देने का कोई फैसला नहीं हुआ है। कौशल विकास विभाग की ओर से जमीन मुहैया कराने पत्र मिला है। इसलिए खाली सरकारी जमीन का चिन्हांकन किया जा रहा। मकान तोड़ना लक्ष्य नहीं है। बहरहाल यक्ष सवाल यह है ,कि आख़िर सरकारी जमीनें संरक्षित क्यों नहीं की जातीं ।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *