

सुनील शर्मा,धमतरी। दिल्ली कें जंतर मंतर में पेपर लिक (नीट) मामले के लिए प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पुलिस ने बल प्रयोग किया। आला नौकरशाहों ! के मुताबिक हालात बेकाबू होने पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले छोड़े। जिससे इलाके में अफरातफरी मच गई।स्थिति की गंभीr हो गई। जंतर- मंतर में छात्रों का शांतिपूर्ण प्रदर्शन अचानक रणक्षेत्र में बदल गया। पुलिस ने उग्र भीड़ को तितर-बितर करने के लिए लाठियां भांजी और आंसू गैस का इस्तेमाल किया, जिसके बाद कई छात्र घायल हो गए।अपनी मांगों को लेकर सड़क पर उतरे छात्रों को क्या इंसाफ के बदले लाठियां मिलेंगी ? यह सवाल हर उस संवेदनशील शख़्स को झकझोंर देता है, जिनमें अब भी मानवता जीवित है।छात्रों के प्रदर्शन को रोकने के लिए पुलिस के दमन व छात्रों की माँग को लेकर लोकमाया ब्यूरो , सुनील शर्मा ने कुछ लोगों से बातचीत की । पेश है, अंश …
ग़ौरतलब है कि * अस्तित्व अंकुर * के ये मुक्तक छात्रों की आवाज को दबाने , उनकी पीड़ा और गूंगी -बहरी असंवेदनशील सरकार ! के रवैए की द्योतक है ।दरअसल भारत भर के लोगों ने ही इस सरकार (भाजपा) को चुना है.. और आज उनसे सभी को सवाल पूछने और जवाबदेही की उम्मीद करने की जरूरत है। भारत एक बहुत बड़ा और विविधताओं वाला देश हैं। जरूरी नहीं कि हर मुद्दे पर हर कोई सहमत भी हों, लेकिन निश्चित रूप से इस बात पर सहमत हो सकते हैं कि शांति पूर्ण प्रदर्शन -संसद मार्च कर रहे छात्रों पर बल प्रयोग करने से पहले उनकी बात सम्मान के साथ सुनी जानी चाहिए थी।
तस्वीरें .. उद्वेलित करती हैं –
उल्लेखनीय रहे कि सीजेपी (कॉकरोच जनता पार्टी )ने सोमवार को जंतर-मंतर से संसद तक मार्च निकाला। सुबह 8 से शाम 5 बजे तक चले प्रदर्शन के दौरान कई बार प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प हुई।सुबह 8 बजे शुरू हुए प्रदर्शन में 10 बजे प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड तोड़कर संसद की ओर मार्च किया। आंदोलनकारी जंतर-मंतर से संसद मार्ग, जनपथ चौराहा, वॉर मेमोरियल, कर्तव्य पथ, विजय चौक होते हुए संसद के करीब पहुंचे।संसद में घुसने की कोशिश की, जिसके बाद संसद की सुरक्षा बढ़ा दी गई, मुख्य द्वार बंद कर दिया । पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े। लाठी चार्ज -पथराव हुए । तस्वीरें भी सामने आईं। इसमें प्रदर्शनकारी छात्र-छात्राएं ,बच्चे और पुलिसकर्मी भी घायल हुए।बहरहाल निहत्थे आंदोलनकारियों पर पुलिस ने लाठीचार्ज और आंसू गैस के गोले दागे। इस दौरान कई लोगों के घायल होने की जो तस्वीरें सामने आईं.. वह उद्वेलित करती हैं ।
- छात्रों पर हुए लाठीचार्ज की
बुद्धिजीवियों ने आलोचना की।बोले- प्रदर्शन में लाठीचार्ज दुखद;,जताई नाराजगी *
केस 1
ज़िंदा रहेंगी यादें…लबे समय जेहन में –
वरिष्ठ पत्रकार अब्दुल रज्जाक रिजवी ने कहा, दमन की ये तस्वीरें मेरे जहन में लंबे समय तक ज़िंदा रहेंगी। शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर इतनी बेरहमी और लाठियों का इस्तेमाल होते देख मुझे बहुत दुख हुआ। इसे निश्चित रूप से ज्यादा सब्र, लोगों की बात सुनने और बातचीत के जरिए संभाला जा सकता था। कहा कि हर उस छात्र और नागरिक का सम्मान है, जिन्होंने शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मान्यताओं के लिए खड़े होने का फैसला किया।
केस 2
लोकतंत्र.. हर नागरिक की आवाज़ –
जितेंद्र गढ़वी ने जंतर-मंतर से संसद तक निकाले गए प्रदर्शन पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, एक स्वस्थ लोकतंत्र की असली पहचान सिर्फ वोट नहीं, बल्कि हर नागरिक की आवाज है।चाहे छात्र हों या देश का कोई भी नागरिक, जब वे अपनी बात रखते हैं तो उसे सुना जाना चाहिए, दबाया नहीं चाहिए।उन्होंने इस बात पर दुख जताया कि प्रदर्शन के दौरान छात्रों को टियर गैस- लाठीचार्ज का सामना करना पड़ा। कहा ,अपनी मांग सरकार तक पहुंचाने के लिए युवाओं का ऐसी परिस्थितियों से गुजरना , चिंताजनक है।
केस 3
..ये , आत्मा का सौदा है –
कॉमरेड समीर कुरैशी ने कहा ,वर्दी पहनने के लिए आत्मा का, आत्मीयता का, सबका सौदा करना पड़ता है..यह मालूम नहीं था। क्या इस देश में कोई नौकरशाह ( पुलिसवाला) नहीं है, जो खड़ा होकर यह बोल सके, कि मैं इस आदेश का पालन नहीं करूंगा, क्योंकि यह गलत है ? उन्होंने छात्रों पर बर्बरता व लाठीचार्ज को दुखद बताया।
केस 4
– हिंसा समाधान नहीं है…
स्मृति शर्मा व दीपमाला ने कहा कि देश का अपने युवाओं के प्रति यह फर्ज है कि वह यह सुनिश्चित करे कि आंदोलन हिंसक न हो और अपने मकसद से न भटके। उन्होंने यह भी कहा कि लोकतंत्र की खूबसूरती बातचीत से ही संभव हैं। शिक्षा व्यवस्था में सुधार की भी मांग की।पेपर लीक, परीक्षा में विफलता, समान अवसर न मिलना, शिक्षकों की कमी और छात्रों पर पड़ने वाले दबाव विकराल रूप ले रहे हैं, जिन पर ध्यान देने की जरूरत है।
केस 5
जायज़ बातें सुने .. निदान भी हो –
मितेश जैन ने कहा ,मैं न तो बीजेपी का समर्थक हूं और न ही कांग्रेस का, लेकिन छात्रों के साथ जो हो रहा है, वह पूरी तरह गलत है। जो छात्र अपनी जायज समस्याओं को लेकर सामने आए हैं ,उनके साथ हिंसा नहीं होनी चाहिए थी। उनकी बातों को सुना जाना चाहिए और उचित समाधान की जानी चाहिए।
